लेख का शीर्षक: पहली बार शेयर कैसे खरीदें? नए निवेशकों के लिए 5 आसान और सुरक्षित स्टेप्स
शेयर बाजार में निवेश करते समय आपने अक्सर देखा होगा कि कुछ शेयरों की कीमत अचानक तेजी से बढ़ती है और फिर एक निश्चित स्तर पर जाकर ठहर जाती है। उस समय उस शेयर में सिर्फ खरीदार नजर आते हैं और बिकवाली पूरी तरह रुक जाती है। इस स्थिति को शेयर बाजार की भाषा में 'अपर सर्किट' (Upper Circuit) कहा जाता है। लेकिन क्या ऐसे शेयरों में पैसा लगाना सुरक्षित है? आइए इसे विस्तार से समझते हैं। 1. अपर सर्किट क्या होता है? शेयर बाजार (NSE और BSE) निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए और बाजार में बहुत अधिक उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए हर शेयर की एक दैनिक सीमा तय करता है। जब किसी शेयर की मांग बहुत अधिक बढ़ जाती है और वह अपनी उस दिन की अधिकतम सीमा (जैसे 5%, 10% या 20%) को छू लेता है, तो ट्रेडिंग रोक दी जाती है। इसका सीधा अर्थ यह है कि बाजार में उस शेयर को खरीदने वाले तो बहुत हैं, लेकिन बेचने वाला कोई भी मौजूद नहीं है। 2. यह सीमा कौन निर्धारित करता है? भारत में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के दिशा-निर्देशों के अनुसार स्टॉक एक्सचेंज यह सीमा तय करते हैं। बड़ी कंपनियां (Large Cap): इनकी सीमा आमतौर पर अधिक होती है क्योंकि इनमें भारी मात्रा में कारोबार होता है। छोटी कंपनियां (Penny Stocks): ऐसी कंपनियों में अक्सर 5% की सीमा होती है ताकि सट्टेबाजी और कीमतों में हेरफेर को रोका जा सके। 3. अपर सर्किट लगने के मुख्य कारण सकारात्मक समाचार: यदि कंपनी को कोई बड़ा सरकारी अनुबंध (Contract) मिले या उसके तिमाही लाभ में भारी वृद्धि हो। ऑपरेटरों की चाल: कई बार बड़े निवेशक जानबूझकर कम वॉल्यूम वाले शेयरों की कीमतें बढ़ाते हैं ताकि आम निवेशक आकर्षित हों। बड़े निवेशकों की खरीदारी: जब कोई बड़ा म्यूच्यूअल फंड या विदेशी निवेशक भारी मात्रा में शेयर खरीदता है। 4. क्या आपको ऐसे शेयर खरीदने चाहिए? (जोखिम का विश्लेषण) अपर सर्किट वाले शेयर दिखने में आकर्षक लग सकते हैं, लेकिन इनमें कुछ गंभीर जोखिम भी होते हैं: तरलता का अभाव (Liquidity Risk): जो शेयर आज केवल खरीदारों के साथ बढ़ रहा है, कल वह 'लोअर सर्किट' में भी जा सकता है। यदि ऐसा हुआ, तो आप अपना शेयर बेच नहीं पाएंगे क्योंकि तब कोई खरीदार नहीं होगा। फँसने का डर: बिना किसी मजबूत व्यापारिक कारण के यदि शेयर बढ़ रहा है, तो वह केवल एक अस्थायी उछाल हो सकता है। निष्कर्ष: निवेश करने से पहले हमेशा कंपनी के मौलिक सिद्धांतों (Fundamentals) की जांच करें। केवल इसलिए शेयर न खरीदें क्योंकि उसमें सर्किट लग रहा है। एक समझदार निवेशक वही है जो बाजार की तेजी में बहने के बजाय शोध पर भरोसा करता है।
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